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Thursday, September 28, 2023

मेवालाल चौधरी ने बिहार शिक्षा मंत्री के पद से घोटालों के आरोप के बीच दिया इस्तीफा

इंडियामेवालाल चौधरी ने बिहार शिक्षा मंत्री के पद से घोटालों के आरोप के बीच दिया इस्तीफा

मेवालाल चौधरी पर बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के कुलपति के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान सहायक प्रोफेसरों और जूनियर वैज्ञानिकों की नियुक्ति में उनके द्वारा कथित रूप से अनियमितताओं और घोटाले के आरोप हैं।

पटना: मेवालाल चौधरी ने आज बिहार के शिक्षा मंत्री का पदभार ग्रहण करने के तीन दिन के अंदर ही पद से इस्तीफा दे दिया। श्री मेवालाल पर भागलपुर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति पद पर रहते हुए नियुक्ति में घोटाले का आरोप है।

मेवालाल चौधरी ने भ्रष्टाचार के आरोपों पर अपने बिहार के शिक्षा मंत्री  के पद से इस्तीफा दे दिया। जाहिर तौर पर मंत्री के रूप में उनकी नियुक्ति के खिलाफ हंगामा और रोष जताया गया। श्री चौधरी को 16 नवंबर को नीतीश कैबिनेट में मंत्री पद की शपथ दिलाई गई थी।

राजद नेता तेजस्वी यादव द्वारा चौधरी के भ्रष्टाचार की पृष्ठभूमि पर किए गए ट्वीट्स की एक श्रृंखला पोस्ट करने के बाद इस्तीफा दिया। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा कि “मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा हत्या और भ्रष्टाचार के अनेक मामलों में IPC की 409, 420, 467, 468, 471 और 120B धारा के तहत आरोपी मेवालाल चौधरी को शिक्षा मंत्री बनाने से बिहारवासियों को क्या शिक्षा मिलती है?”

तेजस्वी प्रसाद यादव ने एक अन्य ट्वीट में मुख्यमंत्री से पूछा है कि “आदरणीय @NitishKumar जी, श्री मेवालाल जी के केस में तेजस्वी को सार्वजनिक रूप से सफाई देनी चाहिए कि नहीं? अगर आप चाहे तो श्री मेवालाल के संबंध में आपके सामने मैं सबूत सहित सफाई ही नहीं बल्कि गाँधी जी के सात सिद्धांतों के साथ विस्तृत विमर्श भी कर सकता हूँ। आपके जवाब का इंतज़ार है।”

 

इसके साथ ही मंत्री पद की शपथ लेने के बाद भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के एक पूर्व अधिकारी ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर मांग की थी कि श्री मेवालाल की पत्नी नीता चौधरी की आग से झुलस कर हुई मौत के मामले की विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराई जाए।

इन दोनों मामलों को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमला कर रहा था । मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी मामला सामने आने के बाद अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) को जांच का आदेश दिया था।

श्री चौधरी को बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के कुलपति के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान सहायक प्रोफेसरों और जूनियर वैज्ञानिकों की नियुक्ति में उनके द्वारा कथित रूप से अनियमितताओं के आरोप हैं।

चौधरी ने दिन में पहले कहा था, “आरोप तभी साबित होता है जब आरोपपत्र दायर किया जाता है या अदालत आदेश देती है और दोनों में से कोई भी मेरे खिलाफ आरोप साबित करने के लिए नहीं है।”

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