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Wednesday, May 22, 2024

प्रधानमंत्री किसानों की समस्या को सुलझाने का प्रयास करें: समन्वय समिति

इंडियाप्रधानमंत्री किसानों की समस्या को सुलझाने का प्रयास करें: समन्वय समिति

एआईकेएससीसी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) बनाम विपक्ष की राजनीति खेल खेलना नहीं चाहिए और उन्हें किसानों की मांगें सुलझाने के लिए पहल करनी चाहिए।

नई दिल्ली: अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा ) बनाम विपक्ष की राजनीतिक खेल खेलना नहीं चाहिये और उन्हें किसानों की मांगे सुलझाने के लिए पहल करनी चाहिये।

समन्वय समिति ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 1800 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि यह 900 रुपये क्विंटल बिक रहा है। सरकार ने खेती में कम्पनियों के निवेश के लिए एक लाख करोड का आवंटन किया है।

प्रधानमंत्री को बताना चाहिये कि नए कानून के बाद किसानों की जमीन और फसल कैसे बचेगी। समिति ने कहा है प्रधानमंत्री का संघर्ष विपक्षी पार्टियों से जुड़ा हुआ है।

खेती के तीन नये कानून जो किसानों की जमीन एवं खेती पर पकड़ समाप्त कर देंगे और विदेशी कम्पनियों तथा बड़े व्यवसायियों को बढ़ावा देंगे।

खेती की अधिरचना में कारपोरेट के निवेश को बढ़ावा देन के लिए सरकार ने एक लाख करोड़ रुपये आवंटित किये है, जबकि सरकार को खुद या सहकारी क्षेत्र द्वारा ये सुविधाएं देनी चाहिए।

न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी)

प्रधानमंत्री को जानकारी होनी चाहिए कि जहां धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी)1870 रुपये है वहां किसान उसे 900 रुपये पर बेचने के लिए मजबूर हैं।

कृृषि मंत्री का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर आश्वासन इस बात से गलत साबित हो जाता है कि नीति आयोग के विशेषज्ञ कह रहे हैं कि सरकार के पास खाने का अत्यधिक भंडार है, न रखने की जगह है न खरीदने का पैसा और मंत्री सरकारी खरीद का कानून बनाने से मना कर रहे हैं।

समय पर भुगतान जैसे अन्य दावों पर कानून कहता है कि रसीद देकर फसल ली जाएगी और तीन दिन बाद भुगतान होगा और यह भी कि भुगतान फसल को आगे बेचने के बाद किया जा सकता है।

एआईकेएससीसी ने सरकार से अपील की है कि वे इन तीन कृषि कानूनों व बिजली बिल 2020 वापस ले और इसके खिलाफ गलत प्रचार न करें। किसान आंदोलन जारी रखने के लिए भी संकल्पबद्ध हैं। इस बीच सिंधु टिकरी और गाजीपुर में किसानों की भीड़ बढ़ती जा रही है और अन्य स्थानों पर भी भागीदारी बढ़ रही है।

[हम्स लाईव]

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