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Thursday, September 28, 2023

किसानों का आंदोलन 41 वें दिन भी जारी है, मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रखने का लिया संकल्प

अर्थव्यवस्थाकिसानों का आंदोलन 41 वें दिन भी जारी है, मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रखने का लिया संकल्प

राजधानी में किसानों का आंदोलन 41 वें दिन भी जारी है। कल किसान संगठनों और सरकार के बीच आठवें दौर की बातचीत में कोई निर्णय नहीं हुआ।

नई दिल्ली: कृषि सुधारों से संबंधित तीन कृषि कानुनों को रद्द करने और फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी दर्जा देने की मांग पर किसान संगठनों के आंदोलन को लेकर राष्ट्रीय राजधानी में मंगलवार को 41 वें दिन भी जारी रहा।

पिछले तीन दिनों से खराब मौसम के बावजूद किसान संगठनों के नेता और कार्यकर्ता राजधानी की सीमाओं पर धरने पर बैठे हैं। किसान संगठनों ने अपनी मांगें पूरी होने तक अपना संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया है। इस आंदोलन को विभिन्न संगठनों का समर्थन भी मिल रहा है।

किसान संगठनों और सरकार के बीच आठवें दौर की बातचीत भी रही विफल

इस बीच कल किसान संगठनों और सरकार के बीच हुई आठवें दौर की बातचीत में कोई निर्णय नहीं हो सका। बातचीत के बाद, कृषि मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि किसानों के साथ बातचीत बहुत अच्छे माहौल में हुई है। उन्हें भरोसा है कि इस मुद्दे को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों के समग्र हित के मद्देनजर कृषि सुधार कानून तैयार किए हैं और अगर इसके साथ कोई समस्या है, तो सरकार इस पर बातचीत करने के लिए तैयार है।

किसान संगठनों का कृषि सुधार कानूनों को वापस लेने पर जोर

श्री तोमर ने कहा कि किसान संगठन कृषि सुधार कानूनों को निरस्त करने पर जोर दे रहे है, जबकि सरकार उन पर विस्तार से बातचीत करना चाहती है। उन्होंने कहा कि 8 जनवरी को होने वाली बैठक सार्थक होगी और वे इसका समाधान करेंगे। दोनों पक्षों के बीच एक समझौते के बाद बातचीत के लिए अगली तारीख 8 जनवरी निर्धारित की गई है।

किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि सरकार कृषि सुधार कानूनों पर बिंदुवार बातचीत पर जोर दे रही है जबकि किसान इन तीनों कृषि सुधार कानुनों को वापस करने की मांग कर रहे हैं।

पिछले दौर की बातचीत में बिजली शुल्क पर दी जा रही सब्सिडी में बदलाव नहीं करने और पराली जलाने वाले किसानों पर कार्रवाई नहीं किए जाने के मामले पर किसानों और सरकार के बीच सहमति बन गई थी लेकिन कृषि सुधार कानुनों को वापस लेने और एमएसपी को कानुनी दर्जा दिये जाने पर गतिरोध बना हुआ है।

[हम्स लाईव]

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