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Wednesday, April 17, 2024

एआईएमआईएम नेता अखतरुल ईमान विकास कार्यों के लिए सड़क से सदन तक सक्रिय

इंडियाएआईएमआईएम नेता अखतरुल ईमान विकास कार्यों के लिए सड़क से सदन तक सक्रिय

चुनाव जीतने के बाद किसी भी राजनीतिक प्रतिनिधि का जो बुनीयदी काम होता है वो है सदन में अपने छेत्र के मुद्दों को उठाना जिसके वो नुमाइंदा हैं।  बिहार विधान सभा में अल्पसंख्यकों, दलितों और विशेषकर विधान सभा छेत्र अमौर बैसा के मुद्दों को काफी मजबूती से उठाने का काम क्या श्री अखतरुल ईमान ने।

अमौर/पूर्णिया: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) बिहार प्रदेश और फलौर लीडर श्री अखतरुल ईमान ने आज अपने छेत्र अमौर में पत्रकारों से बात चीत करते हुए अपने विकास कार्यों के बारे में बताया।

उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के बाद किसी भी राजनीतिक प्रतिनिधि का जो बुनीयदी काम होता है वो है सदन में अपने छेत्र के मुद्दों को उठाना जिसके वो नुमाइंदा हैं।  बिहार विधान सभा में अल्पसंख्यकों, दलितों और विशेषकर विधान सभा छेत्र अमौर बैसा के मुद्दों को काफी मजबूती से उठाने का काम क्या गया।

एक प्रेस विज्ञापिट द्वारा उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य के संबंध में स्कूल और हस्पताल के कामों के बारे मे प्रश्न पूछे गए और उन मुद्दों के समाधान का प्रयास क्या गया। स्कूल की की इमारतें बंद पड़ी थीं उन्हें खोलने की कोशिश की जा रही है। सदन में शिक्षा पॉलिसी पर बात करते हुए शिक्षा, उर्दू भाषा और मदरसों के संबंध में लगातार सवाल किये गए।

हाल ही में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) बिहार प्रदेश और फलौर लीडर श्री अखतरुल ईमान ने शिक्षा पॉलिसी पर बहस के दौरान सदन में बिहार सरकार की शिक्षा पॉलिसी पर कई सवाल उठाए। उर्दू और मदरसों के मामले में सरकार की पलेसियों को दोहरा रवैया भी करार दिया। शिक्षा बजट की कटौती से जनता की पीड़ा और बिहार की शिक्षा स्तिथि पर असेंबली में लगातार प्रश्न उठाए।

सदन में बिहार सरकार से गरीबों, दलितों पिछड़े लोगों के बचों की शिक्षा पर काम करने में ईमानदारी बरतने की मांग की गई है। 2014-15 में बजट का 18.8 प्रतिशत धन राशि दिया गया था और 2020 में इसमें १ प्रतिशत की कटौती पर भी सवाल उठाया गया।

शिक्षा की स्तिथि पर सदन में सरकार पर को आएन देखाते हुए कहा गया कि 2012-13 में 154 लाख बचों का पंजीकरण था जबकि 2018-19 में घटकर 141 लाख (अतः एक कड़ोर एकतालीस लाख) बचे रह गए हैं। दस लाख से ज्यादा बचों के पंजीकरण में कमी पर प्रश्न उठाया गया।

शिक्षा पॉलिसी पर बात करते हुए सदन में कहा गया कि 30 बचों पर एक टीचर की बात काही जा रही थी जबकि पटना में 53 बचों पर, मुंगेर में 51 बचों पर, पूर्णिया में 75 बचों पर एक टीचर है, और हमारे छेत्र के हफानिया हाई स्कूल में 600 बचों पर केवल 2 टीचर है।

शिक्षकों की कमी के बारे में सदन मे लगातार सवाल उठाया गया और कहा गया कि जो लोग टेट (TET) पास किये हुए हैं उनकी बहाली का रास्ता साफ होना चाहिए। शिक्षा केंद्रों के शिक्षकों न हटाने की मांग भी की गई। ट्रैनिंग कॉलेजों में उर्दू टीचरों की कमी की बात की गई और उनकी बहाली की मांग भी की गई।

मद्रास एजुकेशन और अल्पसंख्यकों की शिक्षा के संबंध में सरकार के स्टैन्ड पर सवाल करते हुए फ्लोर लीडर ने कहा कि 2459 के 814 श्रेणी में आने वाले मदरसे जिनकी रिपोर्ट या चुकी है उनकी मंजूरी सरकार अबतक नहीं दे रही है।

हाईकोर्ट ने मदरसा शिक्षकों की पेंशन के बारे में बोला है, फिर भी सरकार पेंशन देने को तैयार नहीं है, तो बिहार में शिक्षा व्यवस्था की क्या स्थिति है।

अल्पसंख्यकों और उर्दू की स्थिति बिहार में सबसे खराब है। उर्दू भाषी आबादी की हालत सबसे खराब है। उर्दू बोलने वाली आबादी के प्रति सरकार दोहरा रवैया अपना रही है।

2006 में, उसी सरकार ने फ़ारसी की शिक्षा बंद कर दी और अब मई 2020 में, उर्दू के ऑप्शनल विषय के रूप में पत्र सं: 779 जारी किया गया है, जिससे उर्दू शिक्षा का रास्ता तकरीबन बंद हो गया है। उर्दू दूसरी आधिकारिक भाषा है जो कि बिहार में लगभग 20 मिलियन लोगों की मातृभाषा है।

सदन में शिक्षा को उर्दू माध्यम से दिए जाने की चर्चा करते हुए कहा गया कि संविधान के हवाले से बुनियादी शिक्षा उर्दू (मातृभाषा) में दी जाने की बात की जा रही है लेकिन उर्दू सलाहकार समिति को पुनर्जीवित नहीं किया गया है, उर्दू लाइब्रेरी अभी तक पुनर्जीवित नहीं हुआ है। शम्स-उल-हुदा मदरसा जो कि एक पुराना मदरसा है, जिसमें नौ के बजाय केवल तीन टीचर हैं और कनिष्ठ वर्ग में बारह के बजाय केवल एक टीचर बहाल किया गया है।

हमारे निर्वाचन क्षेत्र के तहत आने वाले हाफ़निया गाँव में एक अस्पताल 20 वर्षों से बंद था और इसे फिर से खोला जा रहा है। उसी गाँव में एक हाई स्कूल है जिसमें केवल दो शिक्षक थे, शिक्षकों की संख्या चार हो गई है।

रोटा और अमौर हाट में जो ऐतिहासिक परिवर्तन हुआ है, वह भी सबके सामने है, जिसमें शौचालय की व्यवस्था की गई है। इन बाजारों में वसूली की जाती थी इसे रोकने के लिए काम किया गया है। बिजली पर काम रुका हुआ था और अब फिर से शुरू किया जा रहा है। वास्तव में, हमारा ध्यान मूल मुद्दों पर है।

जिनकी भूमि बाढ़ में कट गई थी, उनकी हालत बहुत खराब थी। अब, हमारे प्रयासों के बाद सरकार ने हाल ही में 30 लोगों के लिए मुआवजे की घोषणा की है। हम सभी बाढ़ पीड़ितों को मुआवजा देने की कोशिश कर रहे हैं। हम कई जगहों पर इस संबंध में इन्क्वर्री  भी करा रहे हैं।

छेत्र के जिन महत्वपूर्ण कामों को अंजाम दिया गया वो निम्न लिखित हैं:

बिहार विधानसभा के बजट सत्र में स्थानीय विधायक श्री अख्तरूल ईमान ने अमौर विधानसभा से जुड़े हुए समस्याओं को बड़ी मजबूती से सदन के अंदर सरकार के सामने रखा जो निम्न प्रकार के हैं:

1)  D BR- 27R- 250 (रसेली घाटपूल का निर्माण जिसका DPR  (Delated Project report) बन रहा है।

2) BR 128B (खड़ी पूल) जो DPR विभाग की ओर से बन रहा है।

3) निजी जमीन पर मिट्टी काटने पर प्रशासन की ओर से लोंगो को अब कोई परेशानी नहीं होगी क्योकि विधायक जी ने इस मामले को जब से सदन में उठाया तो माननीय मंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि रयैती जमीन पर मिट्टी काटने पर किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं है।

4) हफनिया हाई स्कूल में पहले 02 शिक्षक ही कार्यरत थे अब शिक्षकों की संख्या बढ़कर 04 हो गई है।

5) हफनिया अस्पताल जो पिछले 20 सालों से बंद पड़ा था। माननीय विधायक जी ने पहले अस्पताल का ताला खुलवाया एवं साथ ही डाक्टर एवं नर्स भी अब अपनी सेवा सुचारू रूप से चलाने लगे है।

6) रौटा एवं अमौर में स्थापित बालिका छात्रावास जो अब तक निर्माणाधीन है। जब यह मामला सदन में मंत्री के समक्ष रखा तो माननीय मंत्री ने स्पष्ट किया है कि दोनों छात्रावासों का निर्माण कार्य मई 2021 तक पूरा करा लिया जाएगा।

7) अमौर एवं बैसा प्रखंडो में जर्जर तारों एवं पोलो की जो स्थिति है इस मामले को भी माननीय विधायक जी ने सदन में रखा जिसके जवाब में उर्जा विभाग मंत्री ने अपने उत्तर में स्पष्ट किया है कि कार्य प्रगति पर है और बचा हुआ काम भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा।

8) डाक्टरो की कमी को लेकर भी सदन में सवाल के जवाब में माननीय मंत्री ने कहा कि डॉक्टरों की नियुक्ति को लेकर विभाग ने राज्य के तकनिकी आयोग को पत्र लिखा है बहुत जल्द ही डाक्टरो की बहाली कर लिया जाएगा।

9) राजस्व कर्मचारियों की कमी संपूर्ण बिहार में एक गंभीर समस्या है। जब इस मामले को विधान सभा में माननीय विधायक जी ने उठाया तो मंत्री जी ने वस्तु स्थिति को स्वीकारा और अपने उत्तर में कहा है कि जल्द ही राजस्व कर्मचारियों की बहाली किया जाएगा।

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